मुंगेली । जिले की राजनीति में इन दिनों एक अजीब सी खामोशी पसरी हुई है। मुख्य विपक्षी दल के रूप में कांग्रेस की भूमिका पर अब स्थानीय गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। विकास कार्यों की कछुआ चाल और कथित भ्रष्टाचार के मामलों पर कांग्रेस का “मौन” अब जनता के गले नहीं उतर रहा है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या यह चुप्पी किसी डर का परिणाम है, किसी दबाव की परिणति है, या फिर पर्दे के पीछे कोई बड़ा ‘मैनेजमेंट’ काम कर रहा है ?
धीमे विकास कार्य से जनता बेहाल…डीएमएफ में भयंकर भ्रष्टाचार…सुशासन तिहार में समस्या जस की तस…विपक्ष शांत…
मुंगेली जिले में सड़कों की बदहाली, गड्ढों, धूल के गुबार और अधूरे पड़े निर्माण कार्य आम आदमी की नियति बन चुके हैं। सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में हो रही देरी से जनता परेशान है, जनहित से जुड़ी समस्याओं का निराकरण नहीं हो पा रहा, रोजाना घंटों बिजली कटौती, बंद हो रही हैं, लेकिन कांग्रेस के स्थानीय नेतृत्व ने इस पर कोई बड़ा आंदोलन खड़ा करना तो दूर, एक कड़ा बयान तक जारी करना मुनासिब नहीं समझा। इसके साथ ही मुंगेलीवासियों ने कहा कि जिले में डीएमएफ में हुए करोड़ों के भ्रष्टाचार पर भी स्थानीय कांग्रेस नेतृत्व चुप्पी साधे हुए हैं, घीमे विकास, निर्माण कार्यो और भ्रष्टाचार के आरोपों पर चुप्पी से जनता हैरान हैं। टेंडर प्रक्रियाओं से लेकर धरातल पर हो रहे घटिया निर्माण तक की चर्चाएं सरेआम हैं। अमूमन ऐसे मुद्दों पर आक्रामक रहने वाली कांग्रेस आखिर क्यों इन मामलों को नजरअंदाज कर रही है ? समझ से बाहर हैं। वही पिछले वर्ष के सुशासन तिहार में दिए आवेदनों का निराकरण नहीं हुआ हैं जिस पर जनता में आक्रोश हैं और कांग्रेस चुप्पी साधे हुए हैं।
तीन बड़े सवाल – डर, दबाव या मैनेजमेंट ?
डर – राजनीतिक विश्लेषकों और आम नागरिकों के बीच तीन मुख्य संभावनाओं पर चर्चा हो रही हैं क्या सत्ता पक्ष की कार्रवाई का कोई अनजाना डर स्थानीय नेताओं को मुखर होने से रोक रहा है ?
दबाव – क्या संगठन के भीतर से या किसी प्रभावशाली गुट की ओर से चुप रहने का कोई दबाव है ?
मैनेजमेंट – या फिर यह “अघोषित समझौते” का हिस्सा है, जहाँ ‘मैनेजमेंट’ के जरिए विपक्ष की आवाज को कुंद कर दिया गया हैं ?
स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ता भी असमंजस में हैं क्योंकि नेताओं की इस निष्क्रियता का सीधा असर जमीन पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं पर पड़ रहा है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर हम जनता के मुद्दों पर नहीं लड़ेंगे, तो आगामी चुनावों में हम किस आधार पर वोट मांगेंगे ? विपक्ष की यह कमजोरी सीधे तौर पर सत्ता पक्ष को ‘वॉकओवर’ देने जैसी स्थिति पैदा कर रही है। ”लोकतंत्र में विपक्ष की चुप्पी सबसे खतरनाक होती है। ऐसे में मुंगेली में कांग्रेस का स्थानीय मुद्दों से गायब रहना न केवल पार्टी के लिए आत्मघाती है, बल्कि जनता के भरोसे के साथ भी खिलवाड़ है।” मुंगेली कांग्रेस को यह समझना होगा कि राजनीति में ‘मौन’ हमेशा साधना नहीं होता, कभी-कभी यह समर्पण का संकेत भी माना जाता है। अब देखना यह है कि क्या स्थानीय कांग्रेस नेतृत्व इस नींद से जागता है या फिर यह चुप्पी किसी बड़ी राजनीतिक अस्थिरता की आहट है।

पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज ने जताया आक्रोश –
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि पूरे प्रदेश में सुशासन तिहार को लेकर जनता में गुस्सा और आक्रोश हैं सुशासन तिहार सिर्फ खानापूर्ति हैं, प्रधानमंत्री आवास के लिए जनता को अधिकारियों का पैर पकड़ना पड़ रहा हैं, डोंगरगढ़ में जनता ने अधिकारियों को कमरे में बंद कर ताला लगा दिया था, मतलब इससे अंदाजा लगाया जा सकता हैं कि पूरे प्रदेश में सुशासन तिहार सिर्फ खानापूर्ति चल रहा हैं, पूरे प्रदेश में आम जनता में जबरदस्त आक्रोश हैं कि पिछले समय जो आवेदन दिए उन आवेदनों में अभी तक कार्यवाही नहीं हुई। श्री बैज ने आगे कहा कि कांग्रेस पार्टी छोटा मुद्दा हो या बड़ा मुद्दा हो हम लोग लगातार उठा रहे हैं, मैं मुंगेली जिलाध्यक्ष से बात करूंगा, कोई कमी हैं तो निश्चित रूप से हम लोग जनता के मुद्दों को लेकर हर लड़ाई लड़ने तैयार हैं।

