मुंगेली। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर देश की आम जनता से बचत करने,संसाधनों का सही उपयोग करने और फिजूलखर्ची से बचने की अपील करते रहे हैं। पीएम मोदी ने देशवासियों से साल भर तक सोना नहीं खरीदने साथ ही ईंधन (फ्यूल) की बचत,विदेश यात्रा नहीं करने सहित ऐसी 7 मुख्य बातों का विशेष रूप से उल्लेख किया था,जिससे देश की अर्थव्यवस्था मजबूत हो सके। प्रधानमंत्री की इस अपील का असर देश के कई हिस्सों में सकारात्मक रूप से देखने को मिला भी है। खुद पीएम मोदी और उनकी कैबिनेट के मंत्रियों ने इसके उदाहरण पेश किए हैं। लेकिन विडंबना देखिए,जिस अपील का पालन देश की आम जनता और शीर्ष नेता कर रहे हैं,उसी अपील की धज्जियां मुंगेली में खुद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के स्थानीय संगठन द्वारा उड़ाई जा रही हैं।
निजी एसी होटल में ‘शाही’ आयोजन,फूटे जनता के बोल
दरअसल,मुंगेली में भाजपा संगठन द्वारा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने और पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूती देने के उद्देश्य से ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण शिविर’ का आयोजन किया गया था। इस आयोजन का उद्देश्य तो संगठनात्मक था,लेकिन इसके लिए चुना गया स्थान और की गई व्यवस्थाएं चर्चा का विषय बन गई हैं। नगर के एक बेहद महंगे और सर्वसुविधायुक्त निजी वातानुकूलित (एसी) होटल में इस शिविर का आयोजन किया गया,जिसमें भाजपा के प्रदेश पदाधिकारी और विधायकगण एवं अन्य जनप्रतिनिधि शामिल हुए।
इस आयोजन में पानी की तरह बहाए गए पैसे और जमकर की गई फिजूलखर्ची को लेकर अब मुंगेली की आम जनता के बीच तीखी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। लोगों का कहना है कि जो पार्टी खुद को अंत्योदय (आखिरी व्यक्ति के विकास) की सोच रखने वाली और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के आदर्शों पर चलने वाली बताती है,उसके नेता प्रशिक्षण के लिए इतने विलासितापूर्ण इंतजाम क्यों कर रहे हैं?जबकि नगर के मध्य में भाजपा का आलीशान कार्यालय है वहां भी इस आयोजन को किया जा सकता था लेकिन वहां नहीं करने के पीछे भाजपा नेताओं की क्या मंशा थी ये तो वही बता सकते हैं
शीर्ष नेताओं ने पेश की सादगी की मिसाल,मुंगेली के नेता ‘लाटसाहब’!
मुंगेली के जागरूक नागरिकों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद अपने काफिले की गाड़ियों की संख्या में कटौती करके देश के सामने एक मिसाल पेश की है। देश के गृहमंत्री,रक्षामंत्री और कई भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी फिजूलखर्ची रोकने के लिए अपने काफिले छोटे कर दिए हैं। कइयों ने तो पर्यावरण और ईंधन की बचत के लिए मेट्रो और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का इस्तेमाल शुरू कर दिया है।
इतना ही नहीं,छत्तीसगढ़ राज्य में ही चल रहे ‘सुशासन तिहार’ के दौरान खुद सूबे के मुख्यमंत्री सादगी की मिसाल पेश करते हुए कई जगहों पर पेड़ की छांव में सभाएं कर रहे हैं। लेकिन इन सबके विपरीत,मुंगेली के भाजपा नेता और कार्यकर्ताओं पर प्रधानमंत्री की इस मुहिम और मुख्यमंत्री की सादगी का रत्ती भर भी असर देखने को नहीं मिल रहा है।
जनता के सुलगते सवाल:क्या नियम सिर्फ हमारे लिए हैं?
इस पूरे वाकये को लेकर मुंगेली की जनता बेहद नाराज है और सत्तापक्ष से सीधे सवाल पूछ रही है
क्या प्रधानमंत्री द्वारा की गई बचत की अपील सिर्फ आम जनता के पालन करने के लिए है?
क्या सत्तापक्ष के नेताओं,विधायकों और कार्यकर्ताओं पर यह नियम लागू नहीं होते?
क्या देश और समाज को सुधारने की सारी जिम्मेदारी सिर्फ आम जनता के कंधों पर ही डाल दी गई है?
क्या राष्ट्रीय और प्रदेश नेतृत्व लेगा संज्ञान?
विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी होने का दंभ भरने वाली भाजपा के स्थानीय नेताओं के इस ‘शाही’ अंदाज ने पार्टी की किरकिरी करा दी है। अब देखना यह होगा कि क्या भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश अध्यक्ष मुंगेली में हुए इस फिजूलखर्ची वाले हाई-प्रोफाइल प्रशिक्षण शिविर का संज्ञान लेंगे? क्या इस फिजूलखर्ची के लिए जिम्मेदार आयोजकों पर कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी,या फिर शीर्ष नेतृत्व भी आम जनता की इस आवाज को नजरअंदाज कर देगा? यह आने वाला वक्त ही बताएगा।
कांग्रेस के जिला अध्यक्ष घनश्याम वर्मा ने भाजपा के इस आयोजन पर तीखा तंज कसते हुए कहाकि भाजपा की कथनी और करनी में जमीन-आसमान का अंतर है। एक तरफ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आम जनता से फिजूलखर्ची रोकने और बचत करने की अपील करते हैं,तो दूसरी तरफ उनकी ही पार्टी के नेता और कार्यकर्ता इस अपील की धज्जियां उड़ा रहे हैं। नगर के एक निजी होटल में जिस तरह से यह आयोजन किया जा रहा है इससे सहज महसूस किया जा सकता है किसत्ता के नशे में चूर भाजपाई इस समय ‘हाई-प्रोफाइल’ आयोजनों और विलासिता में मशगूल हैं। भाजपा के इस दोहरे चरित्र को जनता भली-भांति देख रही है और समझ चुकी है कि यह पार्टी अपनी नीतियों के नाम पर आम जनता को सिर्फ गुमराह करने का काम करती है।

