छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ एजुकेशन ने कहा- झूठे प्रचार की हुई पोल, शासन के फैसले का किया स्वागत
रायपुर।
छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ एजुकेशन (CDBE) ने रजिस्ट्रार, फर्म एवं संस्थाएं, छत्तीसगढ़ द्वारा जारी आदेश का स्वागत करते हुए दावा किया है कि इससे बोर्ड की निर्वाचित कार्यकारिणी को विधिक मान्यता मिल गई है। संस्था ने कहा कि इस आदेश के बाद कई महीनों से चल रहे विवाद और भ्रम की स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो गई है तथा झूठे प्रचार की भी पोल खुल गई है।
गुरुवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि रजिस्ट्रार द्वारा जारी आदेश में जिला प्रशासन की देखरेख में कराए गए चुनाव को वैध माना गया है। संस्था के अनुसार, शासन के निर्देश पर नियुक्त प्रशासक की निगरानी में 27 मार्च 2026 को निष्पक्ष और विधिसम्मत चुनाव संपन्न कराया गया था। चुनाव के बाद प्रस्तुत प्रतिवेदन और अभिलेखों के परीक्षण उपरांत नव-निर्वाचित कार्यकारिणी को अभिलेखों में दर्ज कर लिया गया है।
तीन वर्ष के लिए गठित हुई नई कार्यकारिणी
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार नई कार्यकारिणी का कार्यकाल 27 मार्च 2026 से 26 मार्च 2029 तक रहेगा। कार्यकारिणी में अध्यक्ष के रूप में द राइट रेव्ह. सुभाष कुमार, उपाध्यक्ष नितिन लॉरेन्स, सचिव जयदीप रोबिनसन, कोषाध्यक्ष प्रवीण मसीह तथा सदस्य के रूप में अमित दास, तनुजा पॉल और सुशील मसीह शामिल हैं।
संस्था ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था उच्च न्यायालय, बिलासपुर में लंबित प्रकरण के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी।
झूठे दस्तावेज और अफवाह फैलाने का आरोप
सीडीबीई ने आरोप लगाया कि पिछले कई महीनों से संस्था, उसके वैध पदाधिकारियों तथा अधीनस्थ विद्यालयों को बदनाम करने के उद्देश्य से झूठे दस्तावेज, भ्रामक समाचार और असत्य जानकारी प्रसारित की जा रही थी। संस्था का कहना है कि इससे विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों और ईसाई समाज के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न करने का प्रयास किया गया।
प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि रजिस्ट्रार के ताजा आदेश ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रशासक की देखरेख में विधि सम्मत तरीके से चुनाव कराकर कार्यकारिणी का गठन किया गया है।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और संस्थाओं की गरिमा सर्वोपरि
संस्था ने कहा कि उसका उद्देश्य केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना, अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना तथा विद्यार्थियों के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। किसी भी प्रकार का झूठा प्रचार या दुष्प्रचार विद्यार्थियों और समाज के हितों के विरुद्ध है।
अभिभावकों और समाज से की अपील
सीडीबीई ने अभिभावकों, शिक्षकों, कर्मचारियों और समाज के लोगों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाह, झूठे दस्तावेज अथवा भ्रामक प्रचार पर विश्वास न करें। संस्था ने आग्रह किया है कि केवल सक्षम न्यायालय और वैधानिक प्राधिकारियों द्वारा जारी आदेशों को ही प्रमाणिक माना जाए।
दुष्प्रचार पर होगी कानूनी कार्रवाई
संस्था ने चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में कोई व्यक्ति या समूह झूठे दस्तावेज, मिथ्या आरोप अथवा भ्रामक प्रचार के माध्यम से संस्था की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास करेगा, तो उसके विरुद्ध कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।
नोट: यह समाचार छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ एजुकेशन (CDBE) द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित है। इसमें किए गए दावे संस्था के हैं। यदि इस विषय पर अन्य पक्ष का आधिकारिक बयान उपलब्ध होता है, तो उसे भी प्रकाशित किया जाना चाहिए।


