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New Delhi: हल्दीराम की फ्रैंचाइजी देने के नाम पर लोगों से ठगी, साइबर सेल ने किया पर्दाफाश

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दिल्ली पुलिस के साइबर सेल ने बड़ी बड़ी कंपनियों की फ्रेंचाइजी दिलवाने के नाम और बड़े व्यापारियों को चूना लगाने वाले एक गैंग का पर्दाफाश किया है। साइबर सेल के मुताबिक एक महिला ने शिकायत की कि वो हल्दीराम का आउटलेट खोलना चाहती थी और जब वो ऑनलाइन हल्दीराम का दावा करने वाली एक वेबसाइट देख रही थी तो वेबसाइट के माध्यम से उसे आउटलेट खोलने के लिए हल्दीराम की फ्रैंचाइज़ी और डीलरशिप देने की पेशकश की गई। जिसके बाद वो तुरंत वेबसाइट में दिए गए मोबाइल नंबर से कनेक्ट हो गई। जिसपर उसे अगले कुछ दिनों में फॉर्म भरने, दस्तावेज जमा करने को कहा गया। तमाम दस्तावेज और फॉर्मेलिटी के बाद उसने सिक्योरटी फीस और दूसरे भुगतान मिलाकर कुल 11.74 लाख रुपये दिए, लेकिन उससे एक बार फिर ‘हल्दीराम’ अधिकारियों आशीष कुमार और रवि कुमार ने कहा कि वो 1.6 लाख रुपये का और भुगतान करे तो उसे एहसास हुआ कि हल्दीराम डीलरशिप के नाम पर उसके साथ धोखा हुआ है।

शिकायत मिलने के बाद साइबर सेल ने जांच शुरू की। जांच के दौरान, यह पाया गया कि हल्दीराम के नाम से बड़ी संख्या में वेबसाइटें चल रही हैं, और ये सभी वेबसाइटें हल्दीराम की फ्रेंचाइजी की पेशकश कर रही हैं। जांच के दौरान यह भी पता चला कि देश भर में बड़ी संख्या में लोग इन फर्जी वेबसाइटों के शिकार हुए हैं। यह पाया गया कि जालसाज लोगों को ठगने के लिए दर्जनों नम्बर और बैंक एकाउंट से कनेक्ट करते हैं। ये सब फर्जी सिम कार्ड का इस्तेमाल कर रहे हैं। इन सभी का ब्योरा हासिल किया गया और संदिग्धों की पहचान की गई।

जांच के बाद 27 अगस्त की रात नालंदा , फरीदाबाद , लुधियाना और दिल्ली सहित कई जगहों पर छापेमारी कर 4 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें इसके मास्टरमाइंड विकास मिस्त्री, तकनीकी सहायक विनय विक्रम सिंह, जो एक आईटी सेवा कंपनी के सीईओ हैं को गिरफ्तार किया गया।

पतंजलि और अमूल जैसे ब्रांडों की भी चल रही थी फर्जी साइट

गिरफ्तार आरोपियों के पास से बरामद उपकरणों की जांच और हल्दीराम की फर्जी वेबसाइटों से संबंधित आंकड़ों से पता चला कि आरोपी अमूल और पतंजलि जैसे प्रतिष्ठित ब्रांडों की फर्जी साइट भी चला रहे थे। इन वेबसाइटों का इस्तेमाल पूरे भारत में लोगों को ठगने के लिए किया जा रहा था।

गिरफ्तार विनय विक्रम सिंह फरीदाबाद का रहने वाला है। उसने एमबीए किया है और गुरुग्राम में एक डिजिटल मार्केटिंग कंपनी में सीईओ है। इसका काम था गिरोह के निर्देश पर हल्दीराम की फर्जी वेबसाइट डिजाइन करना और गूगल विज्ञापनों के जरिए फर्जी वेबसाइटों को बढ़ावा देना। आरोपी विकास मिस्त्री बिहार का रहने वाला है। वो गिरोह का मास्टरमाइंड है। वहीं हल्दीराम का अधिकारी बनकर लोगों से बात करता था। आरोपी विनोद कुमार पंजाब का रहने वाला है, उसने बीसीए किया है, जबकि आरोपी संतोष कुमार भी पंजाब का रहने वाला है और इस गोरखधंधे में सहयोगी है।

पूछताछ करने पर, आरोपी विकास ने खुलासा किया कि वह अपने सहयोगियों के साथ हल्दीराम, अमूल, पतंजलि आदि जैसे बड़े ब्रांडों के डोमेन नाम खरीदता था। वह वेबसाइटों को इस तरह से विकसित करवाता था कि वह बड़े ब्रांडों की वास्तविक वेबसाइट के रूप में दिखाई देती थी। वेबसाइट पर एक फोन नंबर भी दिया जाता था। गिरफ्तार आरोपियों के बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और बरामद उपकरणों की जांच से पता चला कि ये लोग 16 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इसी तरह की धोखाधड़ी के 126 मामलों में शामिल हैं। इस गिरोह से जुड़ी ठगी की रकम 1.1 करोड़ रुपये से ज्यादा है।

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