Home हमर छत्तीसगढ़ Pangolin smuggling: छत्तीसगढ़ के तीन जिलों में बिछा है शिकारियों का जाल

Pangolin smuggling: छत्तीसगढ़ के तीन जिलों में बिछा है शिकारियों का जाल

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Pangolin smuggling

गरियाबंद@रवि तिवारी. छत्तीसगढ़ में शिकारिकों का एक बड़ा गिरोह पेंगोलिन के शिकार (Pangolin smuggling) में लगा हुआ है। कैंसर, अस्थमा और दुर्बलता दूर करने वाली दवाओं के नाम पर इस दुर्लभ प्रजाती के वन्य जीव पर खतरा मंडराने लगा है। हालांकि इसके शिकार पर पाबंदी है लेकिन तस्कर भला कहां मानने वाले हैं। ऐसे में इस दुर्लभ प्राणी की जीवन पर खतरा मंडराने लगा है।

आज पेंगुलिन की तस्करी (Pangolin smuggling) करते गरियाबंद पुलिस ने एक शख्स को गिरफ्तार किया है। पिछले दिनों महासमुंद में भी तीन तस्कर पुलिस की गिरफ्त में आए थे। यह तो हाल के मामले है इससे पहले भी छत्तीसगढ़ के अलग-अलग इलाकों से इसकी तस्करी के तार जुड़े हुए हैं।

बता दें कि अंर्तराष्ट्रीय बाजार में पेंगोलिन की कीम लाखों में है। यही वजह है कि तस्कर भारी तादाता में छत्तीसगढ़ व मध्यप्रदेश से इसका शिकार करते हैं। जानकारों के मुताबिक छत्तीसगढ़ में पाए जाने वाले पेंगोलिन की प्रजाति दुनिया के किसी भी कोने में नहीं पाई जाती लिहाजा इस पेंगोलिन के खाल और मांस सहित अन्य अंगों को बड़ी कीमत देकर तस्कर (Pangolin smuggling) बेचते हैं।

महासमुंद के महासमुन्द जिले के बारनवापारा और बलौदाबाजार व गरियाबंद जिले में इस पेंगोलिन की दुर्लभ प्रजाति को देखा जाता है।

कहां जुड़े हैं तार

दरअसल पेंगोलिन शल्क मप्र, छग, ओडिशा व आंध्र प्रदेश से खरीदे जाते हैं। इन्हें असम, मिजोरम व मेघालय में व्यापारियों को बेचा जाता है। यहां से म्यांमार से होते हुए चीन भेजा जाता है। इसकी म्यांमार, चीन, थाईलैंड, मलेशिया, हांगकांग, वियतनाम आदि देशों में अधिक मांग है।

पेंगोलिन के अलग-अलग अंगों का उपयोग

  • जबड़ा- अनिद्रा, मानसिक रोग दूर करने की दवा के लिए उपयोग।
  • दांत- बुखार की दवा के लिए उपयोग।
  • चर्बी- कुष्ठ रोग व वात की दवा में उपयोग।
  • नाक के ऊपर की चमड़ी- जख्म भरने की दवा में उपयोग।
  • मस्तिष्क- आलस्य दूर करने की दवा में उपयोग।
  • आंख की पुतली- मिर्गी की दवा में उपयोग।
  • शल्क- दुर्बलता दूर करने की दवा में उपयोग।
  • शल्क सूप- चीन में इसके शल्क का सूप खूब पिया जाता है।

2 लाख रुपए किलो में बिकता है शल्क

पेंगोलिन भी बाघ की ही तरह शेड्यूल-1 कैटेगरी का वन्य प्राणी है। इसके शल्क की भी कीमत अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बाघ की की कीमत पर होती है। स्थानीय बाजार में इसे 50 हजार रुपए किलो में बेचा जाता तो वहीं अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत डेढ़ लाख से दो लाख के बीच होती है। विदेशी बाजारों में हो रही लगातार मांग के चलते इसकी तस्करी के मामले पिछले एक दशक से काफी देखे जा रहे हैं।

लाखों के तादात में हो चुकी है तस्करी

पैंगोलिन एक ऐसा जानवर है जिसकी दुनिया में सबसे अधिक अवैध तस्‍करी होती है। इसके मांस को जहां चीन और वियतनाम समेत कुछ दूसरे देशों में बेहद चाव से खाया जाता है वहीं इसका उपयोग दवाओं के निर्माण में भी होता है। खासतौर पर चीन की पारंपरिक दवाओं के निर्माण में इसका ज्‍यादा इस्‍तेमाल होता है।

बीते एक दशक के दौरान दस लाख से अधिक पैंगोलिन की तस्‍करी की जा चुकी है।

यही वजह है कि ये दुनिया का सबसे अधिक तस्‍करी किए जाने वाला जानवर बन गया है।

इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजरवेशन ऑफ नेचर (International Union for Conservation of Nature) के मुताबिक

दुनियाभर के वन्‍य जीवों की अवैध तस्‍करी में अकेले 20 फीसद का योगदान पैंगोलिन का ही है।

आपको यहां पर ये भी बता दें

कि चीन और वियतनाम में इसका मांस खाना अमीर होने की निशानी है।

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