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Donkey purchase: मंहगे दामों पर दुनिया भर से गधे क्यों खरीद रहा चीन..?

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Donkey purchase

नई दिल्ली. कोरोना वायरस महामारी से जूझ रहे और कंगाली की कगार पर खड़े पाकिस्तान के लिए चीन एक बड़ा मददगार बन गया है। यह मदद चीन गधे खरीद (Donkey purchase) कर दे रहा है। पिछले दिनों पाकिस्तानी आर्थिक मामलों के सलाहकार अब्दुल हफीज शेख ने कहा था कि देश में गधों की आबादी 55 लाख होने जा रही है। पाकिस्तान इन गधों को चीन भेजकर आर्थिक कमाई कर रहा है। अब ये सवाल उठता है कि आखिर चीन इतने गधों का करता क्या है..?

दरअसल चीन ने पाकिस्तान में बड़ा निवेश किया है। इसके बदले में पाकिस्तान चीन को गधे भेज रहा है। पाकिस्तान के साथ ही अफ्रीका से भी चीन गधे मंगा रहा है। चीन में गधों का इस्तेमाल चीनी दवाओं को बनाने में किया जाता है। चीन में गधे का मांस न सिर्फ खाया जाता है बल्कि चीन की पारंपरिक दवाओं के लिए खास तौर पर गधों का इस्तेमाल किया जाता है।

चीन में गधों की चमड़ी से जिलेटिन नामक पदार्थ से एजियाओ (Ejiao) नाम की दवा बनाई जाती है। यह चीन की पारंपरिक पद्धिती है। इस दवा का इस्तेमाल हडि्डयों के दर्द (Joint pan) के लिए किया जाता है। प्रजनन संबंधी समस्या (Reproductive problem) में भी इस जिलेटिन की दवा का प्रयोग होता है लिहाजा चीन में इसकी काफी मांग होती है।

चीन में इन दवाओं का व्यापार 130 बिलियन डॉलर से ज्यादा का माना जाता है।

इतना ही नहीं, चीन में गधे के अलावा सांप, बिच्छू, मकड़ी और कॉक्रोच जैसे

जीव-जंतुओं से भी दवाएं बनाई जाती हैं।

इन दवाओं से कैंसर (Cancer), स्ट्रोक (Stroke), पर्किंसन (Perkinson),

ह्दय संबधी बीमारी (Heart Disease) और अस्थमा (Asthma) तक का इलाज होता है।

हर साल 50 लाख गधों की जरूरत

चीन में हर साल दवाईयां बनाने के लिए 50 लाख से ज्यादा गधों की जरूरत पड़ती है।

बीते 6 सालों में चीन में गधों की डिमांड काफी बढ़ गई है।

मांग ही नहीं अपितु गधों की तस्करी भी काफी तादात में होने लगी है।

चीन में कभी गधा पालन एक बड़े उद्योग में गिना जाता था,

लेकिन दूसरे कामकाजों के चलते लोग इसमें रूचि नहीं दिखा रहा है।

ऐसे में चीन को दूसरे देशों से गधों की आपूर्ति करनी पड़ रही है।

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