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Special coincidence: कैसे करें शनिदेव को प्रसन्न, लॉकडाउन में वट सावित्री की पूजा

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जय जोहार. आज यानि 22 मई को हिन्दु पंचांग के मुताबिक विशेष संयोग (Special coincidence) बन रहा है। इस दिन शनि जयंती, शनि अमावस्या, वट सावित्री व्रत और कार्तिगाई दीपम का पर्व मनाया जा रहा है। जानें इस विशेष दिन के फायदे..

हिंदू धर्म के लिहाज से आज के दिन पुण्य लाभ पाने का दिन है। कई लिहाज से यह दिन श्रेष्ठ है।

आज कई ऐसे योग और विशेष संयोग (Special coincidence) बन रहे हैं जो धर्म-कर्म के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए सार्थक सिद्ध होगा।

साथ ही सभी प्रकार की मनोकामनाओं को पूरा करने कि लिए भी यह दिन अति-उत्तम माना गया है।

शनि अमावस्या, पितरों की पूजा से मिलेगा लाभ

आज की तिथि शनि अमावस्या की तिथि है।

ज्येष्ठ महीने में कृष्ण पक्ष की अमावस्या का हिन्दु धर्म में एक विशेष स्थान है।

अमावस्या के दिन पितरों की पूजा को बेहतर माना जाता है।

इस दिन पूजा करने न केवल पितृ प्रसन्न होते हैं अपितु जीवन में आने वाली बाधाएं भी दूर होती है।

आज का दिन दान के लिए भी काफी महत्वपूर्ण माना गया है। अमावस्या की पूजा मोक्षदायी मानी जाती है।

ज्येष्ठ अमावस्या का शुभ मुहूर्त

  • अमावस्या तिथि 21 मई की रात में 9 बजकर 35 मिनट से शुरू होगी
  • 22 मई को 11 बजकर 08 मिनट पर यह तिथि समाप्त होगी।

शनि को प्रसन्न करने आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण

आज का दिन शनि जयंती का दिन शनि देव का भी है। आज के दिन को शनि देव के जन्मदिन के तौर पर मनाया जाता है।

सूर्य पुत्र शनि न्याय के देवता माने जाते हैं। शनिदेव किसी भी जातक को उसके कर्मों के आधार पर शुभ व अशुभ फल देते हैं।

इस समय शनि वक्री है व मिथुन, तुला, धनु, मकर और कुंभ राशि पर साढ़ेसाती और अढैय्या चल रही है।

शनि की अशुभता को दूर करने के लिए आज आज का दिन विशेष फलदायी है।

पूजा पाठ से आप शनिदेव के प्रसन्न कर सकते हैं।

शनि देव को प्रसन्न करने पूजा का शुभ मुहूर्त

  • 21 मई को अमावस्या तिथि आरंभ 21 बजकर 35 मिनट पर
  • 22 मई को अमावस्या तिथि समाप्त 23 बजकर 07 मिनट पर

सुहागिनों की होगी हर कामना पूरी

आज का दिन वट सावित्री पूजा का भी दिन है लिहाजा आज के दिन की विशेष मान्यता है।

इस दिन सुहागिन स्त्रियां बरगद के वृक्ष की पूजा करती हैं।

वट पूजा के माध्यम से अपनी पति की लंबी आयु की कामना के साथ ही

तमाम मनोकामनाओं को पूर्ण करने की कामना करती हैं।

वट सावित्री का व्रत रखकर मान्यता के मुताबिक महिलाएं बरगद के पेड़ पर विराजित ब्रह्मा, विष्णु और महेश की पूजा करती हैं।

लॉकडाउन में कैसे करें वट वृक्ष की पूजा

कोरोना वायरस संक्रमण के चलते पूरे देशभर में लॉकडाउन घोषित हैं।

साथ ही सोशल डिस्टेंशिंग के चलते पूजा में विघ्न न हो इसके लिए ज्योतिषाचार्य सलाह दे रहे हैं कि

“घर पर ही वट सावित्री की पूजा कर सकते हैं“

इसके लिए बरगद की टहनी पूजा स्थान पर रखकर उसकी पूजा करें।

कार्तिगाई दीपम में शिव की अराधना

भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए तमिल हिन्दु पूरी श्रद्धा से कार्तिगाई दीपम पर्व मनाते हैं।

आज के दिन शाम के वक्त घरों में व गलियों में दीपक जलाए जाते हैं।

मान्यता के मुताबिक कार्तिगाई दीपम कृतिका नक्षत्र से प्रभावित है। जिस दिन कृत्तिका नक्षत्र होता है उस दिन यह पर्व मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा कर सुख समृद्धि की कामना की जाती है।

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